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यूपी में हर नागरिक तक पहुंचेगा सरकारी योजनाओं का लाभ, योगी सरकार की नई व्यवस्था

संक्षेप:
उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के नागरिकों तक सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे और पारदर्शी तरीके से पहुंचाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। मुख्य सचिव मनोज आलोक कुमार के अनुसार, केंद्र और राज्य सरकार की कुल 98 जनकल्याणकारी योजनाओं को अब फैमिली आईडी से जोड़ा जा चुका है। इस व्यवस्था से प्रदेश के 15 करोड़ 7 लाख से अधिक लोगों को सीधा लाभ मिल रहा है।


अब कोई भी व्यक्ति योजनाओं से वंचित नहीं रहेगा

योगी सरकार का कहना है कि प्रदेश में अब कोई भी पात्र व्यक्ति सरकारी योजनाओं से बाहर नहीं रहेगा। चाहे राशन कार्ड हो या अन्य किसी योजना का लाभ—फैमिली आईडी के जरिए जरूरतमंदों को सरकारी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। आय प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र और अन्य दस्तावेज बनवाने की प्रक्रिया भी अब पहले की तुलना में कहीं ज्यादा सरल कर दी गई है।


फैमिली आईडी से जुड़ी 98 योजनाएं

सरकार के मुताबिक, फैमिली आईडी प्रणाली के तहत केंद्र और यूपी सरकार की 98 योजनाओं को एक प्लेटफॉर्म पर जोड़ा गया है। इसका फायदा यह हुआ है कि अब लाभार्थियों को अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। फैमिली आईडी में एक परिवार की पूरी जानकारी दर्ज होती है, जिससे योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक तेजी से और पारदर्शिता के साथ पहुंच रहा है।


12 अंकों की फैमिली आईडी बनी योजनाओं की चाबी

फैमिली आईडी कार्ड 12 अंकों की एक विशिष्ट पहचान संख्या होती है, जिसमें परिवार के सभी सदस्यों का विवरण शामिल रहता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप इस व्यवस्था का उद्देश्य “एक परिवार–एक पहचान” के सिद्धांत को लागू करना है, ताकि पात्रता के आधार पर योजनाओं का स्वतः चयन हो सके और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाई जा सके।


दस्तावेज़ों के लिए राहत, समय और पैसे की बचत

फैमिली आईडी लागू होने से नागरिकों को आय, जाति और निवास जैसे प्रमाण पत्र बनवाने के लिए अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ रहे हैं। एक बार पंजीकरण होने के बाद जरूरी जानकारी सरकारी सिस्टम में स्वतः उपलब्ध हो जाती है, जिससे लोगों का समय और श्रम दोनों बच रहे हैं।


राशन कार्ड से वंचित परिवारों को भी मिलेगा फायदा

योगी सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जो परिवार किसी कारणवश राशन कार्ड से वंचित हैं, उन्हें भी फैमिली आईडी के माध्यम से सरकारी योजनाओं से जोड़ा जाएगा। इसके लिए विशेष पंजीकरण अभियान चलाया जा रहा है, ताकि कोई भी जरूरतमंद परिवार सरकारी सहायता से बाहर न रहे।


आधार और मोबाइल लिंक अनिवार्य

फैमिली आईडी बनवाने के लिए परिवार के सभी सदस्यों का आधार नंबर जरूरी है। साथ ही आधार से मोबाइल नंबर लिंक होना अनिवार्य किया गया है, ताकि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए लाभार्थियों तक सहायता राशि सीधे पहुंचाई जा सके। यदि किसी लाभार्थी का मोबाइल नंबर बदल गया है, तो उसे आधार से नया नंबर अपडेट कराना होगा।

    विधानसभा चुनाव से पहले TMC को झटका, राज्यसभा सांसद मोसम नूर ने थामा कांग्रेस का हाथ

    संक्षेप:
    पश्चिम बंगाल की राजनीति में चुनावी माहौल के बीच बड़ा बदलाव देखने को मिला है। तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सांसद मोसम नूर ने कांग्रेस में वापसी कर ली है। मालदा के प्रभावशाली खान चौधरी परिवार से जुड़ी मोसम नूर के इस कदम को टीएमसी के लिए नुकसान और कांग्रेस के लिए संगठनात्मक मजबूती के रूप में देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि इससे राज्य के राजनीतिक समीकरणों पर असर पड़ सकता है।

    पश्चिम बंगाल की सियासत में विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा राजनीतिक फेरबदल देखने को मिला है। तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सांसद बंजरी तुरे ने कांग्रेस में वापसी कर ली है, जिससे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी को राजनीतिक झटका लगा है। बंजरी तुरे का कांग्रेस में लौटना खास तौर पर मालदा और मुस्लिम बहुल इलाकों में कांग्रेस की स्थिति को मजबूत कर सकता है।

    दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान बंजरी तुरे ने वरिष्ठ नेता जयराम रमेश, पश्चिम बंगाल प्रभारी गुलाम अहमद मीर और प्रदेश अध्यक्ष शुभंकर सरकार की मौजूदगी में पार्टी की सदस्यता ली। बताया जा रहा है कि उनका राज्यसभा कार्यकाल अप्रैल में समाप्त हो रहा है और वे आगामी विधानसभा चुनाव में सक्रिय भूमिका निभा सकती हैं।

    गौरतलब है कि बंजरी तुरे 2009 से 2019 तक कांग्रेस के टिकट पर मालदा से दो बार लोकसभा सांसद रह चुकी हैं। 2019 में उन्होंने तृणमूल कांग्रेस का दामन थामा, लेकिन लोकसभा चुनाव में उन्हें सफलता नहीं मिली। इसके बाद 2020 में टीएमसी ने उन्हें राज्यसभा भेजा था।

    खान चौधरी परिवार से ताल्लुक रखने वाली बंजरी तुरे की वापसी को कांग्रेस नेतृत्व अहम मान रहा है। पार्टी नेताओं का कहना है कि इससे बंगाल में संगठन को नई ऊर्जा मिलेगी और कांग्रेस एक बार फिर राज्य की राजनीति में मजबूती से खड़ी होगी।

      बांग्लादेश की पूर्व PM खालिदा जिया के जनाज़े में भारत की ओर से कौन होगा शामिल? सामने आया नाम

      बांग्लादेश की राजनीति से एक बड़ी और दुखद खबर सामने आई है। देश की पूर्व प्रधानमंत्री और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की प्रमुख बेगम खालिदा जिया का निधन हो गया है। उन्होंने मंगलवार, 30 दिसंबर 2025 को अस्पताल में इलाज के दौरान अंतिम सांस ली।

      खालिदा जिया के निधन के बाद भारत-बांग्लादेश संबंधों से जुड़ा एक अहम सवाल भी सामने आया—भारत की ओर से उनकी अंतिम यात्रा में कौन शामिल होगा। अब इस पर तस्वीर साफ हो गई है। भारत सरकार की ओर से विदेश मंत्री एस. जयशंकर बांग्लादेश की राजधानी ढाका जाएंगे और खालिदा जिया के जनाज़े में शामिल होकर भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। यह यात्रा बुधवार, 31 दिसंबर 2025 को प्रस्तावित है।

      खालिदा जिया के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी गहरा दुख जताया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट साझा कर संवेदना व्यक्त की और बांग्लादेश के लोगों के प्रति अपनी सहानुभूति जाहिर की। पीएम मोदी ने अपने संदेश में साल 2015 में खालिदा जिया से हुई मुलाकात को भी याद किया और उस मुलाकात की एक तस्वीर साझा की।

      प्रधानमंत्री मोदी ने लिखा कि ढाका में बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और बीएनपी अध्यक्ष बेगम खालिदा जिया के निधन का समाचार बेहद दुखद है। उन्होंने शोक संतप्त परिवार और बांग्लादेश की जनता के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं प्रकट कीं और ईश्वर से परिवार को इस अपूरणीय क्षति को सहने की शक्ति देने की प्रार्थना की।

      पीएम मोदी ने यह भी कहा कि बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री के रूप में खालिदा जिया का योगदान हमेशा याद रखा जाएगा। उन्होंने देश के विकास के साथ-साथ भारत-बांग्लादेश रिश्तों को मज़बूत करने में भी अहम भूमिका निभाई। प्रधानमंत्री ने भरोसा जताया कि खालिदा जिया की सोच और विरासत दोनों देशों के बीच सहयोग को आगे भी दिशा देती रहेंगी।

      बताया जा रहा है कि खालिदा जिया लंबे समय से गंभीर बीमारियों से जूझ रही थीं। उन्हें दिल और फेफड़ों से जुड़ी समस्याएं थीं और इसी वजह से 23 नवंबर 2025 को एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान उनकी हालत में बार-बार उतार-चढ़ाव आता रहा। आखिरी दिनों में वह निमोनिया की चपेट में भी आ गई थीं और करीब 36 दिनों तक डॉक्टरों की सख्त निगरानी में रहीं। अंततः उनकी हालत नाजुक हो गई और उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया।

      खालिदा जिया के निधन से न सिर्फ बांग्लादेश बल्कि पूरे दक्षिण एशिया की राजनीति में एक युग का अंत माना जा रहा है।


      गांधी परिवार से जुड़ने जा रहा एक नया रिश्ता

      कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के बेटे रेहान वाड्रा की सगाई हाल ही में अवीवा बेग से हुई है। यह समारोह पूरी तरह निजी रखा गया, लेकिन इसके बाद से अवीवा बेग और उनके परिवार को लेकर लोगों की जिज्ञासा लगातार बढ़ती जा रही है। खास तौर पर यह जानने की कोशिश की जा रही है कि अवीवा के पिता इमरान बेग कौन हैं और वे क्या करते हैं।

      लाइमलाइट से दूर रहने वाले इमरान बेग

      इमरान बेग दिल्ली के जाने-पहचाने बिजनेसमैन माने जाते हैं, हालांकि वे हमेशा सार्वजनिक चर्चा से दूरी बनाए रखते हैं। वे न तो सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं और न ही अपनी निजी या व्यावसायिक ज़िंदगी को सार्वजनिक करना पसंद करते हैं। उनकी ऑनलाइन प्रोफाइल भी प्राइवेट बताई जाती है। इमरान बेग कई निजी बिजनेस वेंचर्स से जुड़े हुए हैं, लेकिन उनकी कंपनियों या नेटवर्थ को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।

      परिवार का सामाजिक दायरा

      इमरान बेग की पत्नी नंदिता बेग एक प्रतिष्ठित इंटीरियर डिजाइनर हैं और दिल्ली के सोशल सर्कल में उनकी अच्छी पहचान है। नंदिता बेग की दोस्ती प्रियंका गांधी से भी पुरानी बताई जाती है। वह कई कला और फोटोग्राफी से जुड़े आयोजनों में सक्रिय रूप से हिस्सा लेती रही हैं। एक फोटोग्राफी एग्जीबिशन के दौरान उन्हें मशहूर कलाकारों और आर्टिस्ट्स के साथ भी देखा गया था।

      पहले से चला आ रहा रिश्ता

      बताया जाता है कि बेग परिवार और वाड्रा परिवार के बीच रिश्ता कोई नया नहीं है। दोनों परिवार एक-दूसरे को कई सालों से जानते हैं। रेहान वाड्रा और अवीवा बेग की जान-पहचान भी स्कूल के दिनों से रही है, जो समय के साथ एक मजबूत रिश्ते में बदल गई। अब सगाई के साथ यह रिश्ता औपचारिक रूप से पारिवारिक संबंध में बदल गया है।

      अवीवा बेग की अपनी पहचान

      अवीवा बेग सिर्फ किसी बड़े परिवार से जुड़ने की वजह से नहीं, बल्कि अपने काम के कारण भी पहचानी जाती हैं। उन्होंने दिल्ली के मॉडर्न स्कूल से पढ़ाई की और इसके बाद ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी से मीडिया कम्युनिकेशन और जर्नलिज्म में उच्च शिक्षा हासिल की। अवीवा इंटीरियर डिजाइनिंग, फोटोग्राफी और प्रोडक्शन जैसे क्रिएटिव क्षेत्रों में सक्रिय हैं।

      कला और क्रिएटिविटी में सक्रिय भूमिका

      अवीवा बेग ने अपने रचनात्मक काम को कई बड़े आर्ट प्लेटफॉर्म्स पर प्रदर्शित किया है। उनकी प्रदर्शनियों में इंडिया आर्ट फेयर 2023 और इससे पहले 2019 की एक चर्चित प्रदर्शनी शामिल रही है। उन्होंने यह साबित किया है कि वह सिर्फ पारिवारिक पहचान तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अपने दम पर एक अलग मुकाम बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

      2026 की दस्तक के साथ बदलेंगे नियम, आपकी जेब और सुविधाओं पर पड़ेगा सीधा असर

      साल 2026 आम लोगों के लिए कई बड़े बदलाव लेकर आने वाला है। नए साल की शुरुआत के साथ ही ऐसे नियम लागू होंगे, जिनका असर रोजमर्रा की जिंदगी, खर्च और सरकारी सुविधाओं पर साफ नजर आएगा। जनवरी से ही गैस, बैंकिंग, टैक्स, डिजिटल पेमेंट और पहचान से जुड़े नियमों में बदलाव देखने को मिलेगा।

      डिजिटल लेनदेन को सुरक्षित बनाने के लिए यूपीआई और अन्य ऑनलाइन भुगतान व्यवस्थाओं पर निगरानी बढ़ाई जाएगी। सिम कार्ड से जुड़े सत्यापन नियम पहले से ज्यादा कड़े किए जाएंगे, ताकि साइबर ठगी पर लगाम लगाई जा सके। इसके साथ ही कुछ मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर भी नए दिशा-निर्देश लागू किए जा सकते हैं, जिससे फर्जी कॉल और मैसेज के मामलों में कमी आए।

      पैन और आधार को जोड़ने की समयसीमा खत्म होने के बाद जिन लोगों ने यह प्रक्रिया पूरी नहीं की है, उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। जनवरी से ऐसे दस्तावेज निष्क्रिय माने जाएंगे, जिससे टैक्स रिफंड, बैंकिंग सेवाएं और सरकारी योजनाओं का लाभ रुक सकता है।

      कर व्यवस्था में भी बड़ा बदलाव प्रस्तावित है। सरकार नए इनकम टैक्स कानून को लागू करने की तैयारी में है, जो पुराने कानून की जगह लेगा। वहीं सरकारी कर्मचारियों के लिए आठवें वेतन आयोग को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं, जिससे वेतन ढांचे में बदलाव की संभावना है।

      बैंकिंग सेक्टर में भी नए साल से नई दरें लागू होंगी। कुछ बड़े बैंकों द्वारा लोन और फिक्स्ड डिपॉजिट की ब्याज दरों में संशोधन किया जा सकता है, जिसका सीधा असर निवेश और कर्ज पर पड़ेगा।

      घरेलू बजट की बात करें तो रसोई गैस के दाम भी नए साल में बदल सकते हैं। एलपीजी के साथ-साथ सीएनजी, पीएनजी और विमान ईंधन की कीमतों में उतार-चढ़ाव की संभावना है, जिससे परिवहन और घरेलू खर्च प्रभावित हो सकते हैं।

      किसानों और सरकारी कर्मचारियों के लिए राहत की खबर यह है कि नई योजनाओं और वेतन सुधारों पर काम किया जा रहा है। किसानों को योजनाओं का लाभ देने के लिए नई पहचान प्रणाली लागू हो सकती है, जिससे फसल बीमा और नुकसान की भरपाई आसान होगी।

      हालांकि, साल 2026 में गाड़ी खरीदने वालों को झटका लग सकता है, क्योंकि कार और दोपहिया वाहनों की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है।

      CWC बैठक में मनरेगा पर कांग्रेस का हमला, राहुल बोले– फैसला PMO से थोपा गया

      दिल्ली में हुई कांग्रेस कार्य समिति की अहम बैठक में केंद्र सरकार की नीतियों को लेकर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। बैठक में पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने हिस्सा लिया और मौजूदा राजनीतिक हालात पर विस्तार से चर्चा की।

      बैठक के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मनरेगा को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि ग्रामीण रोजगार से जुड़ी इस योजना को कमजोर करने का निर्णय मंत्रिमंडल की सामूहिक प्रक्रिया के बजाय सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय से लिया गया। राहुल गांधी का दावा है कि इस फैसले में न तो संबंधित मंत्रालय की राय ली गई और न ही कैबिनेट स्तर पर कोई व्यापक चर्चा हुई।

      राहुल गांधी ने कहा कि मनरेगा केवल रोजगार योजना नहीं थी, बल्कि यह ग्रामीण नागरिकों को अधिकार देने का माध्यम बनी। उन्होंने इसे खत्म करने या कमजोर करने की कोशिश को सामाजिक ढांचे पर सीधा हमला बताया। नेता प्रतिपक्ष ने इस फैसले की तुलना नोटबंदी जैसे बड़े और नुकसानदेह निर्णयों से की।

      उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार की कार्यशैली संघीय व्यवस्था को कमजोर कर रही है, जहां निर्णय केंद्रीकृत तरीके से लिए जा रहे हैं। राहुल गांधी ने कहा कि देश में अब ‘वन मैन सिस्टम’ हावी होता जा रहा है, जहां फैसले केवल एक ही केंद्र से तय हो रहे हैं।

      वहीं कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी मनरेगा के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि इस योजना ने ग्रामीण भारत को नई पहचान दी। उन्होंने कहा कि मनरेगा की वजह से गांवों से पलायन रुका और कमजोर वर्गों को न्यूनतम आर्थिक सुरक्षा मिली।

      खड़गे ने यह भी याद दिलाया कि किसानों के आंदोलन के दौरान कांग्रेस ने लगातार समर्थन दिया, जिसके चलते सरकार को कृषि कानून वापस लेने पड़े। उन्होंने दावा किया कि जिस तरह तब सरकार को झुकना पड़ा, उसी तरह जनता के दबाव में मनरेगा को भी दोबारा मजबूती देनी होगी।

      कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि पार्टी आने वाले समय में मनरेगा को लेकर देशव्यापी अभियान चलाने की तैयारी में है। उनका कहना है कि मौजूदा हालात में देश का कमजोर तबका कांग्रेस की ओर उम्मीद की नजर से देख रहा है।

      कुलदीप सेंगर को राहत पर भड़का आक्रोश, दिल्ली हाईकोर्ट के बाहर महिलाओं ने उठाई आवाज़

      उन्नाव दुष्कर्म मामले में दोषी करार दिए जा चुके पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली हाईकोर्ट से सशर्त राहत मिलने के बाद देश की राजधानी में विरोध के स्वर तेज़ हो गए हैं। पीड़िता के परिजन और विभिन्न महिला संगठनों से जुड़ी कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार को हाईकोर्ट परिसर के बाहर एकत्र होकर इस फैसले के खिलाफ नाराज़गी जाहिर की और जमानत को निरस्त करने की मांग रखी।

      प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने हस्तक्षेप करते हुए प्रदर्शनकारियों से हाईकोर्ट के बाहर विरोध न करने को कहा। पुलिस ने चेतावनी देते हुए स्पष्ट किया कि अदालत परिसर में प्रदर्शन प्रतिबंधित है और कुछ ही समय में कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर जाने की सलाह दी।

      पीड़िता की मां ने अदालत के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह निर्णय न्याय की भावना को ठेस पहुंचाने वाला है। उन्होंने साफ कहा कि वे अब सुप्रीम कोर्ट का रुख करेंगी। पीड़िता की मां ने भावुक स्वर में कहा कि उन्हें हाईकोर्ट से न्याय की उम्मीद थी, लेकिन यदि देश की सर्वोच्च अदालत से भी राहत नहीं मिली तो वे अंतरराष्ट्रीय मंचों तक जाने से पीछे नहीं हटेंगी। उन्होंने अपने पति की मौत के लिए जिम्मेदार लोगों को कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग भी दोहराई।

      महिला अधिकारों से जुड़ी सामाजिक कार्यकर्ता योगिता भायना ने बताया कि यह विरोध पूरी तरह अहिंसक और लोकतांत्रिक तरीके से किया गया है। उनका कहना है कि पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए यह आवाज़ उठाई जा रही है। उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि उनकी याचिका पर शीघ्र सुनवाई हो। साथ ही यह भी कहा कि यदि न्याय नहीं मिला, तो आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है।
      योगिता भायना ने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध करना नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है।

      इस पूरे घटनाक्रम पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। कांग्रेस नेता मुमताज़ पटेल ने हाईकोर्ट के फैसले को महिलाओं के लिए निराशाजनक बताते हुए कहा कि ऐसे निर्णय समाज में गलत संदेश देते हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह के फैसले न्याय व्यवस्था पर भरोसे को कमजोर करते हैं और महिलाओं के आत्मविश्वास पर गहरा असर डालते हैं।

      गौरतलब है कि दिल्ली हाईकोर्ट ने उन्नाव दुष्कर्म मामले में दोषी पाए गए कुलदीप सिंह सेंगर की सजा पर अस्थायी रोक लगाते हुए उन्हें सशर्त जमानत प्रदान की है। निचली अदालत द्वारा उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। जमानत की शर्तों में 15 लाख रुपये का बेल बॉन्ड शामिल है।

      हालांकि, पीड़िता के पिता की कस्टडी में मौत से जुड़े मामले में जमानत न मिलने के कारण सेंगर को फिलहाल जेल में ही रहना होगा। उस मामले में उन्हें पहले ही 10 साल की सजा सुनाई जा चुकी है।

      जमानत देते समय हाईकोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि कुलदीप सेंगर उस क्षेत्र के 5 किलोमीटर के दायरे में प्रवेश नहीं करेंगे, जहां पीड़िता दिल्ली में निवास कर रही है। इसके अलावा, उन्हें पीड़िता या उसके परिवार से किसी भी तरह का संपर्क करने से सख्त रूप से रोका गया है।