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गांधी परिवार से जुड़ने जा रहा एक नया रिश्ता

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के बेटे रेहान वाड्रा की सगाई हाल ही में अवीवा बेग से हुई है। यह समारोह पूरी तरह निजी रखा गया, लेकिन इसके बाद से अवीवा बेग और उनके परिवार को लेकर लोगों की जिज्ञासा लगातार बढ़ती जा रही है। खास तौर पर यह जानने की कोशिश की जा रही है कि अवीवा के पिता इमरान बेग कौन हैं और वे क्या करते हैं।

लाइमलाइट से दूर रहने वाले इमरान बेग

इमरान बेग दिल्ली के जाने-पहचाने बिजनेसमैन माने जाते हैं, हालांकि वे हमेशा सार्वजनिक चर्चा से दूरी बनाए रखते हैं। वे न तो सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं और न ही अपनी निजी या व्यावसायिक ज़िंदगी को सार्वजनिक करना पसंद करते हैं। उनकी ऑनलाइन प्रोफाइल भी प्राइवेट बताई जाती है। इमरान बेग कई निजी बिजनेस वेंचर्स से जुड़े हुए हैं, लेकिन उनकी कंपनियों या नेटवर्थ को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।

परिवार का सामाजिक दायरा

इमरान बेग की पत्नी नंदिता बेग एक प्रतिष्ठित इंटीरियर डिजाइनर हैं और दिल्ली के सोशल सर्कल में उनकी अच्छी पहचान है। नंदिता बेग की दोस्ती प्रियंका गांधी से भी पुरानी बताई जाती है। वह कई कला और फोटोग्राफी से जुड़े आयोजनों में सक्रिय रूप से हिस्सा लेती रही हैं। एक फोटोग्राफी एग्जीबिशन के दौरान उन्हें मशहूर कलाकारों और आर्टिस्ट्स के साथ भी देखा गया था।

पहले से चला आ रहा रिश्ता

बताया जाता है कि बेग परिवार और वाड्रा परिवार के बीच रिश्ता कोई नया नहीं है। दोनों परिवार एक-दूसरे को कई सालों से जानते हैं। रेहान वाड्रा और अवीवा बेग की जान-पहचान भी स्कूल के दिनों से रही है, जो समय के साथ एक मजबूत रिश्ते में बदल गई। अब सगाई के साथ यह रिश्ता औपचारिक रूप से पारिवारिक संबंध में बदल गया है।

अवीवा बेग की अपनी पहचान

अवीवा बेग सिर्फ किसी बड़े परिवार से जुड़ने की वजह से नहीं, बल्कि अपने काम के कारण भी पहचानी जाती हैं। उन्होंने दिल्ली के मॉडर्न स्कूल से पढ़ाई की और इसके बाद ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी से मीडिया कम्युनिकेशन और जर्नलिज्म में उच्च शिक्षा हासिल की। अवीवा इंटीरियर डिजाइनिंग, फोटोग्राफी और प्रोडक्शन जैसे क्रिएटिव क्षेत्रों में सक्रिय हैं।

कला और क्रिएटिविटी में सक्रिय भूमिका

अवीवा बेग ने अपने रचनात्मक काम को कई बड़े आर्ट प्लेटफॉर्म्स पर प्रदर्शित किया है। उनकी प्रदर्शनियों में इंडिया आर्ट फेयर 2023 और इससे पहले 2019 की एक चर्चित प्रदर्शनी शामिल रही है। उन्होंने यह साबित किया है कि वह सिर्फ पारिवारिक पहचान तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अपने दम पर एक अलग मुकाम बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

2026 की दस्तक के साथ बदलेंगे नियम, आपकी जेब और सुविधाओं पर पड़ेगा सीधा असर

साल 2026 आम लोगों के लिए कई बड़े बदलाव लेकर आने वाला है। नए साल की शुरुआत के साथ ही ऐसे नियम लागू होंगे, जिनका असर रोजमर्रा की जिंदगी, खर्च और सरकारी सुविधाओं पर साफ नजर आएगा। जनवरी से ही गैस, बैंकिंग, टैक्स, डिजिटल पेमेंट और पहचान से जुड़े नियमों में बदलाव देखने को मिलेगा।

डिजिटल लेनदेन को सुरक्षित बनाने के लिए यूपीआई और अन्य ऑनलाइन भुगतान व्यवस्थाओं पर निगरानी बढ़ाई जाएगी। सिम कार्ड से जुड़े सत्यापन नियम पहले से ज्यादा कड़े किए जाएंगे, ताकि साइबर ठगी पर लगाम लगाई जा सके। इसके साथ ही कुछ मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर भी नए दिशा-निर्देश लागू किए जा सकते हैं, जिससे फर्जी कॉल और मैसेज के मामलों में कमी आए।

पैन और आधार को जोड़ने की समयसीमा खत्म होने के बाद जिन लोगों ने यह प्रक्रिया पूरी नहीं की है, उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। जनवरी से ऐसे दस्तावेज निष्क्रिय माने जाएंगे, जिससे टैक्स रिफंड, बैंकिंग सेवाएं और सरकारी योजनाओं का लाभ रुक सकता है।

कर व्यवस्था में भी बड़ा बदलाव प्रस्तावित है। सरकार नए इनकम टैक्स कानून को लागू करने की तैयारी में है, जो पुराने कानून की जगह लेगा। वहीं सरकारी कर्मचारियों के लिए आठवें वेतन आयोग को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं, जिससे वेतन ढांचे में बदलाव की संभावना है।

बैंकिंग सेक्टर में भी नए साल से नई दरें लागू होंगी। कुछ बड़े बैंकों द्वारा लोन और फिक्स्ड डिपॉजिट की ब्याज दरों में संशोधन किया जा सकता है, जिसका सीधा असर निवेश और कर्ज पर पड़ेगा।

घरेलू बजट की बात करें तो रसोई गैस के दाम भी नए साल में बदल सकते हैं। एलपीजी के साथ-साथ सीएनजी, पीएनजी और विमान ईंधन की कीमतों में उतार-चढ़ाव की संभावना है, जिससे परिवहन और घरेलू खर्च प्रभावित हो सकते हैं।

किसानों और सरकारी कर्मचारियों के लिए राहत की खबर यह है कि नई योजनाओं और वेतन सुधारों पर काम किया जा रहा है। किसानों को योजनाओं का लाभ देने के लिए नई पहचान प्रणाली लागू हो सकती है, जिससे फसल बीमा और नुकसान की भरपाई आसान होगी।

हालांकि, साल 2026 में गाड़ी खरीदने वालों को झटका लग सकता है, क्योंकि कार और दोपहिया वाहनों की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है।

CWC बैठक में मनरेगा पर कांग्रेस का हमला, राहुल बोले– फैसला PMO से थोपा गया

दिल्ली में हुई कांग्रेस कार्य समिति की अहम बैठक में केंद्र सरकार की नीतियों को लेकर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। बैठक में पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने हिस्सा लिया और मौजूदा राजनीतिक हालात पर विस्तार से चर्चा की।

बैठक के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मनरेगा को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि ग्रामीण रोजगार से जुड़ी इस योजना को कमजोर करने का निर्णय मंत्रिमंडल की सामूहिक प्रक्रिया के बजाय सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय से लिया गया। राहुल गांधी का दावा है कि इस फैसले में न तो संबंधित मंत्रालय की राय ली गई और न ही कैबिनेट स्तर पर कोई व्यापक चर्चा हुई।

राहुल गांधी ने कहा कि मनरेगा केवल रोजगार योजना नहीं थी, बल्कि यह ग्रामीण नागरिकों को अधिकार देने का माध्यम बनी। उन्होंने इसे खत्म करने या कमजोर करने की कोशिश को सामाजिक ढांचे पर सीधा हमला बताया। नेता प्रतिपक्ष ने इस फैसले की तुलना नोटबंदी जैसे बड़े और नुकसानदेह निर्णयों से की।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार की कार्यशैली संघीय व्यवस्था को कमजोर कर रही है, जहां निर्णय केंद्रीकृत तरीके से लिए जा रहे हैं। राहुल गांधी ने कहा कि देश में अब ‘वन मैन सिस्टम’ हावी होता जा रहा है, जहां फैसले केवल एक ही केंद्र से तय हो रहे हैं।

वहीं कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी मनरेगा के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि इस योजना ने ग्रामीण भारत को नई पहचान दी। उन्होंने कहा कि मनरेगा की वजह से गांवों से पलायन रुका और कमजोर वर्गों को न्यूनतम आर्थिक सुरक्षा मिली।

खड़गे ने यह भी याद दिलाया कि किसानों के आंदोलन के दौरान कांग्रेस ने लगातार समर्थन दिया, जिसके चलते सरकार को कृषि कानून वापस लेने पड़े। उन्होंने दावा किया कि जिस तरह तब सरकार को झुकना पड़ा, उसी तरह जनता के दबाव में मनरेगा को भी दोबारा मजबूती देनी होगी।

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि पार्टी आने वाले समय में मनरेगा को लेकर देशव्यापी अभियान चलाने की तैयारी में है। उनका कहना है कि मौजूदा हालात में देश का कमजोर तबका कांग्रेस की ओर उम्मीद की नजर से देख रहा है।

कुशीनगर में SIR के दौरान वोटर लिस्ट से नाम गायब, ग्राम प्रधान के परिवार तक पहुंचा मामला

कुशीनगर जिले में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया अब विवादों के घेरे में आ गई है। जिस प्रक्रिया का मकसद मतदाता सूची को दुरुस्त करना था, वही अब नाम हटाने को लेकर सवालों में है। स्थिति यह है कि जहां नए मतदाताओं के नाम जोड़े जाने चाहिए थे, वहां बड़ी संख्या में पुराने नाम ही सूची से गायब पाए जा रहे हैं।

ताजा मामला हाटा तहसील के सुकरौली विकासखंड स्थित रामपुर सोहरौना गांव से सामने आया है। यह वही गांव है, जो हाटा विधानसभा से भाजपा विधायक मोहन वर्मा का पैतृक गांव माना जाता है। गांव के मौजूदा ग्राम प्रधान राजेंद्र वर्मा, जो विधायक के भाई हैं, उनके साथ-साथ उनकी पत्नी और बेटे का नाम भी नई मतदाता सूची में नहीं पाया गया।

जैसे ही प्रारंभिक मतदाता सूची सार्वजनिक हुई, गांव में हलचल मच गई। लोगों को तब हैरानी हुई जब पता चला कि ग्राम प्रधान का पूरा परिवार ही वोटर लिस्ट से बाहर हो चुका है। इसके बाद आनन-फानन में बीएलओ और ग्राम सचिव को बैठक बुलानी पड़ी, लेकिन कई घंटे की मशक्कत के बावजूद यह स्पष्ट नहीं हो सका कि नाम हटाए किसने और किस आधार पर।

ग्राम प्रधान राजेंद्र वर्मा का कहना है कि यह समस्या केवल उनके परिवार तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार गांव के 100 से अधिक लोगों के नाम नई वोटर लिस्ट में दर्ज नहीं हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि सभी हटाए गए नामों की दोबारा जांच कर उन्हें जोड़ा जाए, क्योंकि यह मताधिकार से जुड़ा गंभीर विषय है।

मामले के तूल पकड़ने के बाद विधायक मोहन वर्मा का भी बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि इस विषय पर उनकी जिला प्रशासन के अधिकारियों से बातचीत हो चुकी है और आवश्यक सुधार किए जाएंगे। विधायक ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि जांच में किसी तरह की साजिश सामने आती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि यह चूक तकनीकी खामी का नतीजा है या फिर किसी सोची-समझी रणनीति के तहत नाम हटाए गए हैं। यह मामला न केवल SIR प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है, बल्कि आम मतदाताओं की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ाता है। यदि जनप्रतिनिधियों के परिवार तक के नाम सुरक्षित नहीं हैं, तो आम नागरिकों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।

कुलदीप सेंगर को राहत पर भड़का आक्रोश, दिल्ली हाईकोर्ट के बाहर महिलाओं ने उठाई आवाज़

उन्नाव दुष्कर्म मामले में दोषी करार दिए जा चुके पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली हाईकोर्ट से सशर्त राहत मिलने के बाद देश की राजधानी में विरोध के स्वर तेज़ हो गए हैं। पीड़िता के परिजन और विभिन्न महिला संगठनों से जुड़ी कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार को हाईकोर्ट परिसर के बाहर एकत्र होकर इस फैसले के खिलाफ नाराज़गी जाहिर की और जमानत को निरस्त करने की मांग रखी।

प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने हस्तक्षेप करते हुए प्रदर्शनकारियों से हाईकोर्ट के बाहर विरोध न करने को कहा। पुलिस ने चेतावनी देते हुए स्पष्ट किया कि अदालत परिसर में प्रदर्शन प्रतिबंधित है और कुछ ही समय में कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर जाने की सलाह दी।

पीड़िता की मां ने अदालत के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह निर्णय न्याय की भावना को ठेस पहुंचाने वाला है। उन्होंने साफ कहा कि वे अब सुप्रीम कोर्ट का रुख करेंगी। पीड़िता की मां ने भावुक स्वर में कहा कि उन्हें हाईकोर्ट से न्याय की उम्मीद थी, लेकिन यदि देश की सर्वोच्च अदालत से भी राहत नहीं मिली तो वे अंतरराष्ट्रीय मंचों तक जाने से पीछे नहीं हटेंगी। उन्होंने अपने पति की मौत के लिए जिम्मेदार लोगों को कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग भी दोहराई।

महिला अधिकारों से जुड़ी सामाजिक कार्यकर्ता योगिता भायना ने बताया कि यह विरोध पूरी तरह अहिंसक और लोकतांत्रिक तरीके से किया गया है। उनका कहना है कि पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए यह आवाज़ उठाई जा रही है। उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि उनकी याचिका पर शीघ्र सुनवाई हो। साथ ही यह भी कहा कि यदि न्याय नहीं मिला, तो आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है।
योगिता भायना ने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध करना नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है।

इस पूरे घटनाक्रम पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। कांग्रेस नेता मुमताज़ पटेल ने हाईकोर्ट के फैसले को महिलाओं के लिए निराशाजनक बताते हुए कहा कि ऐसे निर्णय समाज में गलत संदेश देते हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह के फैसले न्याय व्यवस्था पर भरोसे को कमजोर करते हैं और महिलाओं के आत्मविश्वास पर गहरा असर डालते हैं।

गौरतलब है कि दिल्ली हाईकोर्ट ने उन्नाव दुष्कर्म मामले में दोषी पाए गए कुलदीप सिंह सेंगर की सजा पर अस्थायी रोक लगाते हुए उन्हें सशर्त जमानत प्रदान की है। निचली अदालत द्वारा उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। जमानत की शर्तों में 15 लाख रुपये का बेल बॉन्ड शामिल है।

हालांकि, पीड़िता के पिता की कस्टडी में मौत से जुड़े मामले में जमानत न मिलने के कारण सेंगर को फिलहाल जेल में ही रहना होगा। उस मामले में उन्हें पहले ही 10 साल की सजा सुनाई जा चुकी है।

जमानत देते समय हाईकोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि कुलदीप सेंगर उस क्षेत्र के 5 किलोमीटर के दायरे में प्रवेश नहीं करेंगे, जहां पीड़िता दिल्ली में निवास कर रही है। इसके अलावा, उन्हें पीड़िता या उसके परिवार से किसी भी तरह का संपर्क करने से सख्त रूप से रोका गया है।

अटल जयंती पर लखनऊ से मोदी का संदेश: राजनीतिक शुचिता, विकास और सबका सम्मान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की 101वीं जयंती पर लखनऊ में ‘राष्ट्र प्रेरणा स्थल’ का उद्घाटन किया। इस अवसर पर अपने भाषण में उन्होंने जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के योगदान को याद करते हुए उनके विचारों को देश के लिए मार्गदर्शक बताया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की राजनीति में अब पारदर्शिता और नैतिकता का एक नया अध्याय शुरू हुआ है। उन्होंने उल्लेख किया कि दिल्ली का राजपथ वर्षों तक उपेक्षा का शिकार रहा, लेकिन अब उसे देश की पहचान के अनुरूप संवारा गया है। मोदी ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री संग्रहालय किसी एक विचारधारा तक सीमित नहीं है, बल्कि वह हर उस व्यक्ति का सम्मान करता है जिसने राष्ट्र के लिए योगदान दिया है, चाहे वह विपक्ष से ही क्यों न हो।

मोदी ने कहा कि एनडीए सरकार ने पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी को सम्मानित किया और समाजवादी नेता मुलायम सिंह यादव को भी राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान दिया गया। उनके अनुसार कांग्रेस और समाजवादी पार्टी से इस तरह की राजनीतिक उदारता की अपेक्षा नहीं की जा सकती। उन्होंने आरोप लगाया कि लंबे समय तक सत्ता में रहने वालों ने भाजपा को बार-बार अनुचित रूप से अपमानित करने की कोशिश की।

प्रधानमंत्री ने डबल इंजन सरकार की चर्चा करते हुए कहा कि इसका सीधा लाभ उत्तर प्रदेश को मिल रहा है और राज्य अब विकास के नए मानक स्थापित कर रहा है। उन्होंने कहा कि यूपी से सांसद होने के नाते उन्हें केंद्र सरकार में इस महत्वपूर्ण राज्य के लिए काम करने का अवसर मिला, जो उनके लिए गर्व की बात है। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर सहित प्रदेश के धार्मिक स्थलों ने अब वैश्विक पहचान हासिल की है और प्रेरणा स्थल जैसे प्रोजेक्ट्स प्रदेश की छवि को और मजबूत कर रहे हैं।

मोदी ने कहा कि उनकी सरकार अटल बिहारी वाजपेयी और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के विचारों से प्रेरित होकर काम कर रही है। आज़ादी के बाद लंबे समय तक देश के उपेक्षित वर्गों और राष्ट्रीय एकता से जुड़ी समस्याएं बनी रहीं, लेकिन उनकी सरकार को स्वतंत्रता के 70 वर्ष पूरे होने के बाद इन चुनौतियों से निपटने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि आज देश संविधान के अमृतकाल में प्रवेश कर चुका है।

प्रधानमंत्री ने दावा किया कि पिछले दस वर्षों में करोड़ों लोगों को गरीबी से बाहर निकाला गया है। प्रधानमंत्री आवास योजना और अन्य कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से गरीबों को सम्मानजनक जीवन की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिला है। उन्होंने बताया कि 2014 से पहले लगभग 25 करोड़ लोग सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से वंचित थे, जबकि आज करीब 95 करोड़ नागरिक इस सुरक्षा व्यवस्था के अंतर्गत आ चुके हैं। उत्तर प्रदेश में भी बड़ी संख्या में लोगों को इन योजनाओं का लाभ मिला है।