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फालतू PIL पर सख्त CJI, याचिकाकर्ता को लगाई फटकार, भारी जुर्माने के संकेत

सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को जनहित याचिकाओं (PIL) के दुरुपयोग को लेकर कड़ा रुख देखने को मिला। बिहार चुनाव से जुड़ी एक PIL पर सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने याचिकाकर्ता के वकील को कड़ी फटकार लगाई और साफ शब्दों में कहा कि अदालत को केवल पब्लिसिटी पाने का मंच नहीं बनाया जा सकता।

सुनवाई के दौरान जैसे ही संबंधित वकील अदालत में पेश हुआ, CJI ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि इस तरह की याचिकाएं न्यायपालिका का समय बर्बाद करती हैं। पीठ ने टिप्पणी की कि बिना ठोस आधार के दाखिल की गई याचिकाएं न तो जनहित में होती हैं और न ही लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करती हैं।

CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिकाकर्ता की मंशा पर सवाल उठाते हुए आदेश दिया कि वह पिछले पांच वर्षों के अपने इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) का पूरा ब्योरा अदालत में पेश करे। अदालत का संकेत साफ था कि अगर याचिका केवल प्रचार के उद्देश्य से दाखिल की गई पाई गई, तो उस पर भारी जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

कोर्ट ने यह भी कहा कि चुनाव जैसी संवेदनशील लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में अनावश्यक हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा। पीठ के अनुसार, हाल के वर्षों में PIL का दायरा जनहित से हटकर व्यक्तिगत लोकप्रियता और राजनीतिक एजेंडे का साधन बनता जा रहा है, जो बेहद चिंताजनक है।

लीगल एक्सपर्ट्स का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट का यह सख्त रुख उन लोगों के लिए चेतावनी है जो बिना पुख्ता तथ्यों के अदालत का दरवाजा खटखटाते हैं। अदालत ने साफ कर दिया है कि भविष्य में इस तरह की निराधार और फालतू जनहित याचिकाओं पर कड़ा आर्थिक दंड लगाया जा सकता है।फ़िलहाल इस ख़बर पर आपकी क्या राय है कमेंट जरूर करें!

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