विधानसभा चुनाव से पहले TMC को झटका, राज्यसभा सांसद मोसम नूर ने थामा कांग्रेस का हाथ
संक्षेप:
पश्चिम बंगाल की राजनीति में चुनावी माहौल के बीच बड़ा बदलाव देखने को मिला है। तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सांसद मोसम नूर ने कांग्रेस में वापसी कर ली है। मालदा के प्रभावशाली खान चौधरी परिवार से जुड़ी मोसम नूर के इस कदम को टीएमसी के लिए नुकसान और कांग्रेस के लिए संगठनात्मक मजबूती के रूप में देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि इससे राज्य के राजनीतिक समीकरणों पर असर पड़ सकता है।

पश्चिम बंगाल की सियासत में विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा राजनीतिक फेरबदल देखने को मिला है। तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सांसद बंजरी तुरे ने कांग्रेस में वापसी कर ली है, जिससे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी को राजनीतिक झटका लगा है। बंजरी तुरे का कांग्रेस में लौटना खास तौर पर मालदा और मुस्लिम बहुल इलाकों में कांग्रेस की स्थिति को मजबूत कर सकता है।
दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान बंजरी तुरे ने वरिष्ठ नेता जयराम रमेश, पश्चिम बंगाल प्रभारी गुलाम अहमद मीर और प्रदेश अध्यक्ष शुभंकर सरकार की मौजूदगी में पार्टी की सदस्यता ली। बताया जा रहा है कि उनका राज्यसभा कार्यकाल अप्रैल में समाप्त हो रहा है और वे आगामी विधानसभा चुनाव में सक्रिय भूमिका निभा सकती हैं।
गौरतलब है कि बंजरी तुरे 2009 से 2019 तक कांग्रेस के टिकट पर मालदा से दो बार लोकसभा सांसद रह चुकी हैं। 2019 में उन्होंने तृणमूल कांग्रेस का दामन थामा, लेकिन लोकसभा चुनाव में उन्हें सफलता नहीं मिली। इसके बाद 2020 में टीएमसी ने उन्हें राज्यसभा भेजा था।
खान चौधरी परिवार से ताल्लुक रखने वाली बंजरी तुरे की वापसी को कांग्रेस नेतृत्व अहम मान रहा है। पार्टी नेताओं का कहना है कि इससे बंगाल में संगठन को नई ऊर्जा मिलेगी और कांग्रेस एक बार फिर राज्य की राजनीति में मजबूती से खड़ी होगी।
