कुशीनगर में SIR के दौरान वोटर लिस्ट से नाम गायब, ग्राम प्रधान के परिवार तक पहुंचा मामला
कुशीनगर जिले में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया अब विवादों के घेरे में आ गई है। जिस प्रक्रिया का मकसद मतदाता सूची को दुरुस्त करना था, वही अब नाम हटाने को लेकर सवालों में है। स्थिति यह है कि जहां नए मतदाताओं के नाम जोड़े जाने चाहिए थे, वहां बड़ी संख्या में पुराने नाम ही सूची से गायब पाए जा रहे हैं।
ताजा मामला हाटा तहसील के सुकरौली विकासखंड स्थित रामपुर सोहरौना गांव से सामने आया है। यह वही गांव है, जो हाटा विधानसभा से भाजपा विधायक मोहन वर्मा का पैतृक गांव माना जाता है। गांव के मौजूदा ग्राम प्रधान राजेंद्र वर्मा, जो विधायक के भाई हैं, उनके साथ-साथ उनकी पत्नी और बेटे का नाम भी नई मतदाता सूची में नहीं पाया गया।
जैसे ही प्रारंभिक मतदाता सूची सार्वजनिक हुई, गांव में हलचल मच गई। लोगों को तब हैरानी हुई जब पता चला कि ग्राम प्रधान का पूरा परिवार ही वोटर लिस्ट से बाहर हो चुका है। इसके बाद आनन-फानन में बीएलओ और ग्राम सचिव को बैठक बुलानी पड़ी, लेकिन कई घंटे की मशक्कत के बावजूद यह स्पष्ट नहीं हो सका कि नाम हटाए किसने और किस आधार पर।
ग्राम प्रधान राजेंद्र वर्मा का कहना है कि यह समस्या केवल उनके परिवार तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार गांव के 100 से अधिक लोगों के नाम नई वोटर लिस्ट में दर्ज नहीं हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि सभी हटाए गए नामों की दोबारा जांच कर उन्हें जोड़ा जाए, क्योंकि यह मताधिकार से जुड़ा गंभीर विषय है।
मामले के तूल पकड़ने के बाद विधायक मोहन वर्मा का भी बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि इस विषय पर उनकी जिला प्रशासन के अधिकारियों से बातचीत हो चुकी है और आवश्यक सुधार किए जाएंगे। विधायक ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि जांच में किसी तरह की साजिश सामने आती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि यह चूक तकनीकी खामी का नतीजा है या फिर किसी सोची-समझी रणनीति के तहत नाम हटाए गए हैं। यह मामला न केवल SIR प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है, बल्कि आम मतदाताओं की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ाता है। यदि जनप्रतिनिधियों के परिवार तक के नाम सुरक्षित नहीं हैं, तो आम नागरिकों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।
