Breaking News
उत्तर प्रदेश में स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) प्रक्रिया के बाद जारी……

उत्तर प्रदेश में स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) प्रक्रिया के बाद जारी की गई ड्राफ्ट वोटर लिस्ट ने सियासी हलकों में हलचल बढ़ा दी है। इस प्रक्रिया के तहत राज्य में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। ड्राफ्ट आंकड़ों के मुताबिक यूपी में करीब तीन करोड़ वोटरों के नाम कटे हैं, जो बिहार की तुलना में कहीं अधिक बताए जा रहे हैं।

निर्वाचन आयोग की ओर से स्पष्ट किया गया है कि ड्राफ्ट सूची में जिन मतदाताओं के नाम शामिल नहीं किए गए हैं, उन्हें अपनी आपत्तियां दर्ज कराने का पूरा अवसर दिया जाएगा। आयोग के अनुसार, 12 मार्च तक अंतिम मतदाता सूची जारी की जाएगी, जबकि उससे पहले आपत्तियों और दावों का निपटारा किया जाएगा।

लोक भवन में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि SIR अभियान के दौरान लगभग 15.44 करोड़ मतदाताओं का सत्यापन किया गया। इनमें से करीब 2.89 करोड़ नाम विभिन्न कारणों से ड्राफ्ट सूची में शामिल नहीं किए गए हैं। हटाए गए नामों में मृत मतदाता, स्थायी रूप से स्थानांतरित लोग और डुप्लीकेट एंट्री शामिल हैं।

आंकड़ों के अनुसार, ड्राफ्ट सूची से बाहर किए गए मतदाताओं में लगभग 46 लाख मृत, 2.17 करोड़ स्थानांतरित और करीब 25 लाख डुप्लीकेट नाम पाए गए हैं। आयोग ने यह भी कहा कि जिन मतदाताओं के नाम गलती से हटे हैं, वे निर्धारित समयसीमा के भीतर दावा प्रस्तुत कर सकते हैं।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने यह भी बताया कि राज्य में सबसे अधिक नाम राजधानी लखनऊ में काटे गए हैं। इसके अलावा प्रयागराज, कानपुर नगर, आगरा, गाजियाबाद, बरेली, मेरठ, शाहजहांपुर और जौनपुर जैसे जिलों में भी बड़ी संख्या में नाम ड्राफ्ट सूची से बाहर हुए हैं।

निर्वाचन आयोग के मुताबिक अब तक बड़ी संख्या में मतदाताओं को नोटिस भेजे जा चुके हैं और फॉर्म-6, 7 और 8 के माध्यम से दावे व आपत्तियां ली जा रही हैं। आयोग ने भरोसा दिलाया है कि सभी शिकायतों की निष्पक्ष जांच के बाद अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन किया जाएगा, ताकि किसी भी पात्र मतदाता का अधिकार प्रभावित न हो।

बांग्लादेश में आम चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल अस्थिर होता जा रहा…..

बांग्लादेश में आम चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल लगातार अस्थिर होता जा रहा है। जमात-ए-इस्लामी ने दावा किया है कि देश में इस समय निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव कराना संभव नहीं है। पार्टी का आरोप है कि मौजूदा हालात में सत्ता पक्ष एक विशेष राजनीतिक दल को बढ़त दिलाने की कोशिश कर रहा है।

जमात-ए-इस्लामी की केंद्रीय कार्यकारिणी की हालिया बैठक के बाद जारी बयान में कहा गया कि फरवरी में होने वाले संसदीय चुनाव से पहले राजनीतिक परिस्थितियों की गहन समीक्षा की गई है। पार्टी का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए प्रशासनिक तंत्र का दुरुपयोग किया जा रहा है, जिससे लोकतंत्र कमजोर हो रहा है।

बयान में यह भी उल्लेख किया गया कि पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद अंतरिम सरकार के नेतृत्व में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) को अगली सरकार के सबसे मजबूत दावेदार के रूप में देखा जा रहा है। गौरतलब है कि 2001 से 2006 के बीच जमात-ए-इस्लामी, बीएनपी के साथ गठबंधन सरकार का हिस्सा रही थी और आगामी चुनावों में एक बार फिर बीएनपी की प्रमुख सहयोगी मानी जा रही है।

पार्टी प्रमुख डॉ. शफीकुर रहमान की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह भी कहा गया कि जमात को देश के विभिन्न हिस्सों से शिकायतें मिली हैं, जिनमें आरोप लगाए गए हैं कि कुछ सरकारी अधिकारी खुले तौर पर एक खास राजनीतिक दल के पक्ष में काम कर रहे हैं। जमात नेताओं ने हाल के महीनों में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं पर हो रहे हमलों पर भी चिंता जताई।

इसके साथ ही जमात-ए-इस्लामी ने चुनाव आयोग और कानून-व्यवस्था से जुड़े संस्थानों से अपील की है कि वे अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों का ईमानदारी से निर्वहन करें, ताकि देश में निष्पक्ष, शांतिपूर्ण और विश्वसनीय चुनाव सुनिश्चित किए जा सकें।