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यूपी में हर नागरिक तक पहुंचेगा सरकारी योजनाओं का लाभ, योगी सरकार की नई व्यवस्था

संक्षेप:
उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के नागरिकों तक सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे और पारदर्शी तरीके से पहुंचाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। मुख्य सचिव मनोज आलोक कुमार के अनुसार, केंद्र और राज्य सरकार की कुल 98 जनकल्याणकारी योजनाओं को अब फैमिली आईडी से जोड़ा जा चुका है। इस व्यवस्था से प्रदेश के 15 करोड़ 7 लाख से अधिक लोगों को सीधा लाभ मिल रहा है।


अब कोई भी व्यक्ति योजनाओं से वंचित नहीं रहेगा

योगी सरकार का कहना है कि प्रदेश में अब कोई भी पात्र व्यक्ति सरकारी योजनाओं से बाहर नहीं रहेगा। चाहे राशन कार्ड हो या अन्य किसी योजना का लाभ—फैमिली आईडी के जरिए जरूरतमंदों को सरकारी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। आय प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र और अन्य दस्तावेज बनवाने की प्रक्रिया भी अब पहले की तुलना में कहीं ज्यादा सरल कर दी गई है।


फैमिली आईडी से जुड़ी 98 योजनाएं

सरकार के मुताबिक, फैमिली आईडी प्रणाली के तहत केंद्र और यूपी सरकार की 98 योजनाओं को एक प्लेटफॉर्म पर जोड़ा गया है। इसका फायदा यह हुआ है कि अब लाभार्थियों को अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। फैमिली आईडी में एक परिवार की पूरी जानकारी दर्ज होती है, जिससे योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक तेजी से और पारदर्शिता के साथ पहुंच रहा है।


12 अंकों की फैमिली आईडी बनी योजनाओं की चाबी

फैमिली आईडी कार्ड 12 अंकों की एक विशिष्ट पहचान संख्या होती है, जिसमें परिवार के सभी सदस्यों का विवरण शामिल रहता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप इस व्यवस्था का उद्देश्य “एक परिवार–एक पहचान” के सिद्धांत को लागू करना है, ताकि पात्रता के आधार पर योजनाओं का स्वतः चयन हो सके और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाई जा सके।


दस्तावेज़ों के लिए राहत, समय और पैसे की बचत

फैमिली आईडी लागू होने से नागरिकों को आय, जाति और निवास जैसे प्रमाण पत्र बनवाने के लिए अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ रहे हैं। एक बार पंजीकरण होने के बाद जरूरी जानकारी सरकारी सिस्टम में स्वतः उपलब्ध हो जाती है, जिससे लोगों का समय और श्रम दोनों बच रहे हैं।


राशन कार्ड से वंचित परिवारों को भी मिलेगा फायदा

योगी सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जो परिवार किसी कारणवश राशन कार्ड से वंचित हैं, उन्हें भी फैमिली आईडी के माध्यम से सरकारी योजनाओं से जोड़ा जाएगा। इसके लिए विशेष पंजीकरण अभियान चलाया जा रहा है, ताकि कोई भी जरूरतमंद परिवार सरकारी सहायता से बाहर न रहे।


आधार और मोबाइल लिंक अनिवार्य

फैमिली आईडी बनवाने के लिए परिवार के सभी सदस्यों का आधार नंबर जरूरी है। साथ ही आधार से मोबाइल नंबर लिंक होना अनिवार्य किया गया है, ताकि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए लाभार्थियों तक सहायता राशि सीधे पहुंचाई जा सके। यदि किसी लाभार्थी का मोबाइल नंबर बदल गया है, तो उसे आधार से नया नंबर अपडेट कराना होगा।

    विधानसभा चुनाव से पहले TMC को झटका, राज्यसभा सांसद मोसम नूर ने थामा कांग्रेस का हाथ

    संक्षेप:
    पश्चिम बंगाल की राजनीति में चुनावी माहौल के बीच बड़ा बदलाव देखने को मिला है। तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सांसद मोसम नूर ने कांग्रेस में वापसी कर ली है। मालदा के प्रभावशाली खान चौधरी परिवार से जुड़ी मोसम नूर के इस कदम को टीएमसी के लिए नुकसान और कांग्रेस के लिए संगठनात्मक मजबूती के रूप में देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि इससे राज्य के राजनीतिक समीकरणों पर असर पड़ सकता है।

    पश्चिम बंगाल की सियासत में विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा राजनीतिक फेरबदल देखने को मिला है। तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सांसद बंजरी तुरे ने कांग्रेस में वापसी कर ली है, जिससे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी को राजनीतिक झटका लगा है। बंजरी तुरे का कांग्रेस में लौटना खास तौर पर मालदा और मुस्लिम बहुल इलाकों में कांग्रेस की स्थिति को मजबूत कर सकता है।

    दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान बंजरी तुरे ने वरिष्ठ नेता जयराम रमेश, पश्चिम बंगाल प्रभारी गुलाम अहमद मीर और प्रदेश अध्यक्ष शुभंकर सरकार की मौजूदगी में पार्टी की सदस्यता ली। बताया जा रहा है कि उनका राज्यसभा कार्यकाल अप्रैल में समाप्त हो रहा है और वे आगामी विधानसभा चुनाव में सक्रिय भूमिका निभा सकती हैं।

    गौरतलब है कि बंजरी तुरे 2009 से 2019 तक कांग्रेस के टिकट पर मालदा से दो बार लोकसभा सांसद रह चुकी हैं। 2019 में उन्होंने तृणमूल कांग्रेस का दामन थामा, लेकिन लोकसभा चुनाव में उन्हें सफलता नहीं मिली। इसके बाद 2020 में टीएमसी ने उन्हें राज्यसभा भेजा था।

    खान चौधरी परिवार से ताल्लुक रखने वाली बंजरी तुरे की वापसी को कांग्रेस नेतृत्व अहम मान रहा है। पार्टी नेताओं का कहना है कि इससे बंगाल में संगठन को नई ऊर्जा मिलेगी और कांग्रेस एक बार फिर राज्य की राजनीति में मजबूती से खड़ी होगी।