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खुद की मौत का नाटक करना कितना भारी पड़ सकता है? जानिए कानून क्या कहता है

उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले से सामने आया एक चौंकाने वाला मामला इन दिनों चर्चा में है, जहां एक व्यक्ति ने अपनी ही मौत की झूठी कहानी रच दी। सवाल उठता है कि अगर कोई इंसान जिंदा रहते हुए खुद को मरा हुआ दिखाने की कोशिश करे, तो क्या उसके लिए कानून में सजा का प्रावधान है?

दरअसल, रानीखेत इलाके में एक युवक ने लोगों को गुमराह करने के लिए अपना स्कूटर गहरी खाई में छोड़ दिया और यह दिखाने की कोशिश की कि उसकी मौत हो चुकी है। इस घटना के बाद पुलिस ने करीब 19 दिनों तक बड़े स्तर पर खोज अभियान चलाया। बाद में जांच में खुलासा हुआ कि वह व्यक्ति दिल्ली में अपनी पहली पत्नी और बच्चों के साथ रह रहा था। उसकी मंशा साफ थी—वह अपनी दूसरी पत्नी से छुटकारा पाना चाहता था।

इस घटना के बाद यह चर्चा तेज हो गई कि क्या भारत में अपनी मौत का नाटक करना अपराध की श्रेणी में आता है।

क्या कानून में खुद की मौत का नाटक करना जुर्म है?

भारतीय कानून में सिर्फ मौत का नाटक करना अपने आप में कोई अलग अपराध नहीं माना गया है। लेकिन जैसे ही इसका इस्तेमाल किसी को धोखा देने, जिम्मेदारियों से बचने या किसी को मानसिक, सामाजिक या आर्थिक नुकसान पहुंचाने के लिए किया जाता है, यह गंभीर अपराध बन जाता है। ऐसे मामलों में भारतीय न्याय संहिता के तहत कार्रवाई की जाती है।

धोखा देने पर हो सकती है लंबी सजा

अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर दूसरों को भ्रमित करने के लिए खुद को मृत दिखाता है, तो इसे धोखाधड़ी माना जाता है। भारतीय न्याय संहिता की धारा 318 के तहत ऐसे मामलों में दोषी को 3 से 7 साल तक की जेल और जुर्माने की सजा हो सकती है। जीवनसाथी या परिवार को यह यकीन दिलाना कि व्यक्ति की मौत हो चुकी है, कानून की नजर में गंभीर धोखा माना जाता है।

कानून से बचने की कोशिश भी अपराध

अगर कोई व्यक्ति गिरफ्तारी या कानूनी कार्रवाई से बचने के इरादे से अपनी मौत का नाटक करता है, तो यह न्याय में बाधा डालने के समान है। ऐसे मामलों में भारतीय न्याय संहिता की धारा 262 के तहत 2 साल तक की जेल या जुर्माना लगाया जा सकता है।

फर्जी दस्तावेज बनवाने पर और सख्त कार्रवाई

यदि कोई व्यक्ति नकली मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाता है या उसका इस्तेमाल करता है, तो यह जालसाजी के दायरे में आता है। ऐसे मामलों में बीएनएस की धारा 336 और 338 के तहत 3 से 7 साल तक की सजा का प्रावधान है।

इतना ही नहीं, अगर कोई इंसान अपनी झूठी मौत दिखाकर नई पहचान अपनाता है, तो यह भी अपराध है। बीएनएस की धारा 319 के तहत इसके लिए 3 साल तक की जेल हो सकती है। वहीं, इस तरह की साजिश में मदद करने वालों पर भी कानून सख्त है—बीएनएस की धारा 249 के तहत ऐसे लोगों को 3 से 5 साल तक की सजा दी जा सकती है।

बांग्लादेश की पूर्व PM खालिदा जिया के जनाज़े में भारत की ओर से कौन होगा शामिल? सामने आया नाम

बांग्लादेश की राजनीति से एक बड़ी और दुखद खबर सामने आई है। देश की पूर्व प्रधानमंत्री और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की प्रमुख बेगम खालिदा जिया का निधन हो गया है। उन्होंने मंगलवार, 30 दिसंबर 2025 को अस्पताल में इलाज के दौरान अंतिम सांस ली।

खालिदा जिया के निधन के बाद भारत-बांग्लादेश संबंधों से जुड़ा एक अहम सवाल भी सामने आया—भारत की ओर से उनकी अंतिम यात्रा में कौन शामिल होगा। अब इस पर तस्वीर साफ हो गई है। भारत सरकार की ओर से विदेश मंत्री एस. जयशंकर बांग्लादेश की राजधानी ढाका जाएंगे और खालिदा जिया के जनाज़े में शामिल होकर भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। यह यात्रा बुधवार, 31 दिसंबर 2025 को प्रस्तावित है।

खालिदा जिया के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी गहरा दुख जताया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट साझा कर संवेदना व्यक्त की और बांग्लादेश के लोगों के प्रति अपनी सहानुभूति जाहिर की। पीएम मोदी ने अपने संदेश में साल 2015 में खालिदा जिया से हुई मुलाकात को भी याद किया और उस मुलाकात की एक तस्वीर साझा की।

प्रधानमंत्री मोदी ने लिखा कि ढाका में बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और बीएनपी अध्यक्ष बेगम खालिदा जिया के निधन का समाचार बेहद दुखद है। उन्होंने शोक संतप्त परिवार और बांग्लादेश की जनता के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं प्रकट कीं और ईश्वर से परिवार को इस अपूरणीय क्षति को सहने की शक्ति देने की प्रार्थना की।

पीएम मोदी ने यह भी कहा कि बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री के रूप में खालिदा जिया का योगदान हमेशा याद रखा जाएगा। उन्होंने देश के विकास के साथ-साथ भारत-बांग्लादेश रिश्तों को मज़बूत करने में भी अहम भूमिका निभाई। प्रधानमंत्री ने भरोसा जताया कि खालिदा जिया की सोच और विरासत दोनों देशों के बीच सहयोग को आगे भी दिशा देती रहेंगी।

बताया जा रहा है कि खालिदा जिया लंबे समय से गंभीर बीमारियों से जूझ रही थीं। उन्हें दिल और फेफड़ों से जुड़ी समस्याएं थीं और इसी वजह से 23 नवंबर 2025 को एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान उनकी हालत में बार-बार उतार-चढ़ाव आता रहा। आखिरी दिनों में वह निमोनिया की चपेट में भी आ गई थीं और करीब 36 दिनों तक डॉक्टरों की सख्त निगरानी में रहीं। अंततः उनकी हालत नाजुक हो गई और उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया।

खालिदा जिया के निधन से न सिर्फ बांग्लादेश बल्कि पूरे दक्षिण एशिया की राजनीति में एक युग का अंत माना जा रहा है।


गांधी परिवार से जुड़ने जा रहा एक नया रिश्ता

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के बेटे रेहान वाड्रा की सगाई हाल ही में अवीवा बेग से हुई है। यह समारोह पूरी तरह निजी रखा गया, लेकिन इसके बाद से अवीवा बेग और उनके परिवार को लेकर लोगों की जिज्ञासा लगातार बढ़ती जा रही है। खास तौर पर यह जानने की कोशिश की जा रही है कि अवीवा के पिता इमरान बेग कौन हैं और वे क्या करते हैं।

लाइमलाइट से दूर रहने वाले इमरान बेग

इमरान बेग दिल्ली के जाने-पहचाने बिजनेसमैन माने जाते हैं, हालांकि वे हमेशा सार्वजनिक चर्चा से दूरी बनाए रखते हैं। वे न तो सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं और न ही अपनी निजी या व्यावसायिक ज़िंदगी को सार्वजनिक करना पसंद करते हैं। उनकी ऑनलाइन प्रोफाइल भी प्राइवेट बताई जाती है। इमरान बेग कई निजी बिजनेस वेंचर्स से जुड़े हुए हैं, लेकिन उनकी कंपनियों या नेटवर्थ को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।

परिवार का सामाजिक दायरा

इमरान बेग की पत्नी नंदिता बेग एक प्रतिष्ठित इंटीरियर डिजाइनर हैं और दिल्ली के सोशल सर्कल में उनकी अच्छी पहचान है। नंदिता बेग की दोस्ती प्रियंका गांधी से भी पुरानी बताई जाती है। वह कई कला और फोटोग्राफी से जुड़े आयोजनों में सक्रिय रूप से हिस्सा लेती रही हैं। एक फोटोग्राफी एग्जीबिशन के दौरान उन्हें मशहूर कलाकारों और आर्टिस्ट्स के साथ भी देखा गया था।

पहले से चला आ रहा रिश्ता

बताया जाता है कि बेग परिवार और वाड्रा परिवार के बीच रिश्ता कोई नया नहीं है। दोनों परिवार एक-दूसरे को कई सालों से जानते हैं। रेहान वाड्रा और अवीवा बेग की जान-पहचान भी स्कूल के दिनों से रही है, जो समय के साथ एक मजबूत रिश्ते में बदल गई। अब सगाई के साथ यह रिश्ता औपचारिक रूप से पारिवारिक संबंध में बदल गया है।

अवीवा बेग की अपनी पहचान

अवीवा बेग सिर्फ किसी बड़े परिवार से जुड़ने की वजह से नहीं, बल्कि अपने काम के कारण भी पहचानी जाती हैं। उन्होंने दिल्ली के मॉडर्न स्कूल से पढ़ाई की और इसके बाद ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी से मीडिया कम्युनिकेशन और जर्नलिज्म में उच्च शिक्षा हासिल की। अवीवा इंटीरियर डिजाइनिंग, फोटोग्राफी और प्रोडक्शन जैसे क्रिएटिव क्षेत्रों में सक्रिय हैं।

कला और क्रिएटिविटी में सक्रिय भूमिका

अवीवा बेग ने अपने रचनात्मक काम को कई बड़े आर्ट प्लेटफॉर्म्स पर प्रदर्शित किया है। उनकी प्रदर्शनियों में इंडिया आर्ट फेयर 2023 और इससे पहले 2019 की एक चर्चित प्रदर्शनी शामिल रही है। उन्होंने यह साबित किया है कि वह सिर्फ पारिवारिक पहचान तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अपने दम पर एक अलग मुकाम बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।